बिहार स्वास्थ्य विभाग : 32,000 पदों पर दिसंबर तक भर्ती, मंगल पांडेय की नई पहल से मजबूत होगी व्यवस्था

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By Anubhav Ranjan

बिहार के नवगठित एनडीए सरकार में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने पदभार ग्रहण करते ही विभागीय रिक्तियों को भरने का बड़ा ऐलान किया है। 25 नवंबर 2025 को प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि दिसंबर माह तक सामान्य चिकित्सा पदाधिकारियों के 663 रिक्त पदों और दंत चिकित्सा पदाधिकारियों के 808 पदों पर नियुक्ति पूरी कर ली जाएगी। एएनएम (सहायक नर्स मिडवाइफ) के 8,938 पदों हेतु अधियाचना बिहार तकनीकी सेवा आयोग (BTSC) को भेजी गई है। स्टाफ नर्स (जीएनएम) के 11,389 पदों और ट्यूटर (नर्सिंग) के 498 पदों पर परीक्षा हो चुकी है; BTSC से अनुशंसा मिलते ही पदस्थापन होगा।

आयुष क्षेत्र में 121 चिकित्सक शिक्षकों, चिकित्सा महाविद्यालयों में सहायक प्राध्यापकों के 1,711 पदों, सीनियर रेजिडेंट/ट्यूटर के 1,047 पदों, संविदा सह-प्राध्यापकों के 655 और प्राध्यापकों के 269 पदों हेतु विज्ञापन जारी हैं। तकनीकी स्तर पर फार्मासिस्ट (2,473), परिधापक (3,326), प्रयोगशाला तकनीशियन (2,969), एक्स-रे तकनीशियन (1,232), शल्यकक्ष सहायक (1,683), ईसीजी तकनीशियन (242) और दंत कर्मी (702) सहित कुल 12,627 पदों की परीक्षा पूरी हो चुकी है; BTSC अनुशंसा पर शीघ्र भर्ती होगी। इसके अलावा, 5,006 एएनएम, 1,504 आयुष चिकित्सा पदाधिकारी और 220 नेत्र सहायकों की नियुक्ति तीन माह में पूर्ण होगी। विशेषज्ञ चिकित्सकों के 36, सामान्य चिकित्सकों के 449 और 216 CHO (कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर) की प्रतीक्षा सूची से पदस्थापन इसी माह हो जाएगा। कुल मिलाकर, 32,000 से अधिक पदों पर भर्ती से ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत होंगी।

राज्य में सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों की स्थिति भी उत्साहजनक है। वर्तमान में 11 महाविद्यालय संचालित हैं, जहां 1,420 MBBS, 790 PG और 109 DNB सीटें उपलब्ध हैं। हाल ही में PG में 160 और DNB में 109 सीटें बढ़ाई गईं; अगले लक्ष्य PG में 210 और DNB में 150 की वृद्धि है। 10 महाविद्यालय और अस्पताल निर्माणाधीन हैं, जबकि अगले तीन वर्षों में 1,300 नई UG सीटें जोड़ी जाएंगी। 10 नए महाविद्यालयों की स्वीकृति मिल चुकी है, साथ ही 7 नए जिलों में सैद्धांतिक अनुमति प्राप्त हुई। निजी क्षेत्र में चिकित्सा महाविद्यालय 8 से बढ़कर 12 हो गए, जहां 1,900 MBBS और 449 PG सीटें हैं। दरभंगा, भागलपुर, मुजफ्फरपुर और गया में सुपरस्पेशलिटी OPD शुरू हो चुकी; 6 माह में IPD सेवाएं चालू होंगी। राज्य में 12,365 बेड उपलब्ध हैं, जो अगले 2-3 वर्षों में 11,922 अतिरिक्त बेड जोड़कर कुल 24,287 हो जाएंगे।

आयुष चिकित्सा क्षेत्र में प्रगति तेज है। पटना, बेगूसराय, दरभंगा, भागलपुर और बक्सर में 5 राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय व अस्पताल कार्यरत हैं। प्रस्तावित कार्यक्रमों में 7 जिलों (दरभंगा, मधुबनी, बेगूसराय, गया, सिवान, गोपालगंज, मोतीहारी) में 50 शैय्यायुक्त एकीकृत आयुष अस्पतालों का निर्माण शुरू होगा, प्रत्येक पर 15 करोड़ का प्रावधान। 50 शैय्या वाले नवाब मंजिल के संचालन हेतु 2025-26 SAAP में 35 लाख रुपये आवंटित। अररिया, बांका और मधुबनी में 10 शैय्या वाले 3 अस्पतालों के लिए 7 करोड़ का बजट है।

विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार भी प्राथमिकता में है। राज्य के 440 स्वास्थ्य संस्थानों (जिला अस्पताल से PHC तक) में निःशुल्क नेत्र जाँच और चश्मा वितरण सुविधा उपलब्ध। जीविका के साथ अभिसरण से महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा; 150 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में ‘दीदी की रसोई’ शुरू करने का लक्ष्य। 328 PHC पर स्तनपान कॉर्नर स्थापित होंगे। सभी संस्थानों में आवश्यक दवा सूची के अनुरूप दवाएं सुनिश्चित। आधारभूत संरचना के लिए 3,200 नए स्वास्थ्य उपकेंद्र सक्रिय और 1,500 उपकेंद्र भवनों का निर्माण लक्ष्य। बिहार राज्य आधारभूत संरचना निगम द्वारा भोजपुर व वैशाली के राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों का निर्माण पूरा होगा। 215 करोड़ की लागत से लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल में 400 शैय्यायुक्त अतिविशिष्ट हड्डी रोग ब्लॉक आमजन को समर्पित किया जाएगा।

पांडेय ने कहा कि ये कदम SDG-3 (स्वास्थ्य लक्ष्य) को साकार करेंगे, जहां डिजिटल हेल्थ, टीकाकरण और ग्रामीण पहुंच पर फोकस रहेगा। NHM के तहत 7,600 अतिरिक्त पद भी भरे जाएंगे। इससे बिहार की स्वास्थ्य रैंकिंग सुधरेगी, और सुशासन मॉडल मजबूत बनेगा।