बिहार की ‘क्रेडिट वॉर’: नीतीश-भाजपा का शह-मात, जनता का शोषण!

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By Anubhav Ranjan

अरे वाह, बिहार में एनडीए की ‘सुपर गठबंधन’ सरकार बनते ही क्या हो गया? मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के बीच क्रेडिट लेने की ऐसी होड़ मच गई कि लगता है, सत्ता का कुर्सी न सही, तो कम से कम ‘मेरा क्रेडिट’ तो बचा लूं! राष्ट्रीय जनता दल के प्रवक्ता एजाज अहमद ने बिल्कुल सही पकड़ा – ये शह और मात का खेल जनता के लिए नहीं, सिर्फ अपनी पीठ थपथपाने का तमाशा है।

देखिए न, जदयू वाले चिल्ला-चिल्ला कर नौकरी, रोजगार और ‘विकास का डंका’ पीट रहे हैं। नीतीश जी तो रोज सुबह उठते ही अपने ‘विश्वासपात्र’ अफसरों को बुला लाते हैं – बिना भाजपा के मंत्रियों को खबर किए! पटना के निरीक्षण में तो जैसे ‘नीतीश प्राइवेट लिमिटेड’ चल रहा हो। वाह रे साझा सरकार! वहीं भाजपा वाले अपराध रोकने के नाम पर 400 माफियाओं की लिस्ट लहरा रहे हैं। अरे भाई, 20 साल से नीतीश ही गृह मंत्री रहे, सुशासन का ढोल पीटते रहे – अब भाजपा आकर कह रही, “हम आए तो अपराध भागा!” ये तो सीधा नीतीश के ‘सुशासन बाबू’ को ही ठेंगा दिखाना है। कहीं नीतीश जी का ‘सुशासन’ भाजपा के ‘एक्शन’ से ही मात खा न जाए!

और जनता? वो तो बस तमाशबीन बनी देख रही। सरकार के स्तर पर कोई ठोस काम? जी ना! सिर्फ जुमलेबाजी, एक-दूसरे को नीचा दिखाने की राजनीति, और क्रेडिट की लूट। नई सरकार बनी, लेकिन वीजन-मिशन? वो तो कहीं खो गया। मंत्री लोग अपने ‘बखान मोड’ में लगे हैं – नीतीश के अफसर भाजपा को छकाते, भाजपा जदयू को चिढ़ाती। लगता है, ये गठबंधन ‘शत्रु देशों का मिलन’ जैसा है, जहां हर कदम पर संदेह!

एजाज अहमद साहब ने ठीक कहा – इससे जनहित का नुकसान हो रहा। बेरोजगार युवा इंतजार कर रहे, अपराधी सड़कों पर मंडरा रहे, लेकिन सत्ता के सिपहियों का फोकस सिर्फ ‘मेरा क्रेडिट’ पर। बिहार की जनता पूछ रही – ये ‘एनडीए ड्रामा’ कब खत्म होगा? या ये शह-मात का खेल ऐसे ही चलेगा, जब तक जनता का सब्र न टूट जाए? वैसे, अगली बार क्रेडिट लेने की होड़ में कहीं नीतीश जी भाजपा को ‘मात’ न दे दें – फिर तो असली तमाशा बनेगा! हाहा, बिहार की राजनीति – क्रेडिट की ‘लूट’ में माहिर!

Prashant Kumar ‘Pranay’  Political Analyst Ambika Ujala