मकर संक्रांति 2026: शास्त्रीय गणना के अनुसार 15 जनवरी को ही पुण्यकाल, 14 जनवरी को रात्रि प्रवेश

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By Anubhav Ranjan

मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी (गुरुवार) को ही शास्त्रसम्मत एवं ज्योतिषीय रूप से मान्य होगा। यह जानकारी ज्योतिष विज्ञान केंद्र, वाराणसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं महामहोपाध्याय पंडित नागेंद्र पाण्डेय द्वारा किए गए गहन शास्त्रीय अध्ययन एवं खगोलीय गणना के आधार पर दी गई है

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 14 जनवरी 2026 को रात्रि 9 बजकर 38 मिनट पर सूर्यदेव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के इस राशि परिवर्तन को संक्रांति कहा जाता है। चूँकि यह संक्रांति रात्रि काल में घटित हो रही है, इसलिए धर्मशास्त्रों में वर्णित नियमों के अनुसार इसका पुण्यकाल अगले दिन माना जाएगा।

शास्त्रीय ग्रंथों का स्पष्ट निर्देश

निर्णय सिंधु’, ‘धर्म सिंधु’, ‘काल निर्णय’ सहित अन्य स्मृति ग्रंथों में उल्लेख है कि यदि संक्रांति रात्रि में हो और उसका प्रभाव 20 से 40 घटी (लगभग 8 से 16 घंटे) तक बना रहे, तो उसे उदयव्यापिनी संक्रांति कहा जाता है। ऐसी स्थिति में संक्रांति का पुण्यकाल अगले दिन सूर्योदय से मान्य होता है।

इस शास्त्रीय सिद्धांत के अनुसार
मकर संक्रांति का पुण्यकाल: 15 जनवरी 2026 (गुरुवार)
इसी दिन स्नान-दान, सूर्योपासना, तिल-गुड़ सेवन, खिचड़ी प्रसाद, तिल दान, वस्त्र दान, जप, तर्पण एवं अन्य पुण्यकर्म करना धर्मसम्मत और फलदायी होगा।

चुड़ा-दही पर्व भी 15 जनवरी को

पूर्वांचल, बिहार, झारखंड एवं उत्तर भारत में प्रचलित चूड़ा–दही (मकर संक्रांति) पर्व भी 15 जनवरी को ही मनाया जाएगा।

धार्मिक महत्व

मकर संक्रांति के दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं, जिसे देवताओं के दिन का आरंभ माना गया है। यह पर्व आरोग्य, दीर्घायु, सुख-समृद्धि और पुण्य वृद्धि का प्रतीक है। इस दिन किया गया दान अक्षय फल प्रदान करता है।

राष्ट्रव्यापी सूचना

ज्योतिष विज्ञान समिति के राष्ट्रीय सदस्य पं. ब्रजेश पाण्डेय ने देशवासियों से अपील की है कि वर्ष 2026 में मकर संक्रांति एवं चुड़ा–दही पर्व 15 जनवरी को ही मनाया जाए। यह निर्णय धर्मशास्त्र, प्राचीन आचार्यों की मान्यताओं एवं ज्योतिषीय गणनाओं के पूर्णतःअनुरूप है।