
प्राथमिक शिक्षा निदेशालय, बिहार ने निपुण बिहार मिशन को मजबूत बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। वर्ष 2026 तक कक्षा 1 से 3 के सभी बच्चों में बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक कौशल (एफएलएन) की सार्वभौमिक उपलब्धि सुनिश्चित करने के लक्ष्य से यह मिशन, जो 5 सितंबर 2022 से सक्रिय है, अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी दिशा में सभी जिलों से चयनित दो-दो शिक्षकों को निपुण शिक्षक के रूप में तैयार करने हेतु शिक्षा विभाग के मदन मोहन झा सभागार में एक दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। निदेशक श्रीमती साहिला के मार्गदर्शन में यह कार्यक्रम विशेषज्ञों द्वारा संचालित हुआ, जिसमें मिशन की मूल अवधारणाओं, प्रगति मापदंडों तथा स्कूल-स्तरीय शैक्षिक परिवर्तनों पर गहन प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यशाला का प्रमुख लक्ष्य इन निपुण शिक्षकों को अपने संस्थानों को आदर्श निपुण स्कूलों में बदलने की रणनीतियों से सशक्त बनाना था। साथ ही, जिला स्तर पर सभी निपुण श्रेणी शिक्षकों के साथ मासिक समीक्षा सभाओं को अनिवार्य करने पर बल दिया गया। इसके लिए निदेशालय ने निपुण शिक्षक मासिक पंचांग जारी किया, जो निर्धारित बिंदुओं पर आधारित मूल्यांकन एवं नियोजन सभाओं के आयोजन का मार्गदर्शन प्रदान करता है। प्रतिभागियों को बिहार के कक्षा 1, 2 एवं 3 के छात्रों की वर्तमान अधिगम स्थिति से परिचित कराया गया तथा स्कूल स्तर पर त्वरित सुधार हेतु आवश्यक शैक्षिक कदमों की जानकारी दी गई, जैसे गतिविधि-आधारित शिक्षण, मातृभाषा पर जोर तथा समग्र विकास उपाय।
कार्यक्रम का शुभारंभ निदेशक श्रीमती साहिला द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से हुआ, जो मिशन की गंभीरता को रेखांकित करता था। विशेषज्ञों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप एफएलएन को मजबूत करने पर चर्चा की, जिसमें शिक्षक प्रशिक्षण, सीखने के अंतरालों का आकलन तथा गुणवत्ता सुधार शामिल हैं। सेंट्रल स्क्वायर फाउंडेशन की पूरी टीम ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया, जबकि मृदुला कुमारी ने कार्यक्रम का संचालन किया। अंत में, सभी निपुण शिक्षकों को प्रशस्ति प्रमाण-पत्र भेंट कर प्रोत्साहित किया गया, जिससे प्रतिभागी उत्साहित एवं प्रेरित नजर आए। उन्होंने अपने जिलों में मिशन के सशक्त क्रियान्वयन हेतु पूर्ण निष्ठा का आश्वासन दिया।

यह कार्यशाला निपुण भारत मिशन का स्थानीय रूप, जो केंद्रीय पहल का हिस्सा है, को प्रभावी बनाने में मील का पत्थर साबित हुई। बिहार सरकार का यह प्रयास प्राथमिक शिक्षा को सशक्त कर राज्य के भविष्य को आकार देगा, जहां हर बच्चा तीसरी कक्षा तक स्वतंत्र रूप से पढ़ने, समझने तथा गणितीय समस्याओं को सुलझाने में निपुण बनेगा। प्रतिभागियों ने कार्यक्रम की सराहना की तथा मासिक पंचांग को उपयोगी बताया। निदेशालय ने घोषणा की कि इसी तरह की और कार्यशालाएं आयोजित होंगी, ताकि 2026 लक्ष्य निर्धारित समय पर हासिल हो।
प्रशांत कुमार ‘प्रणय’