इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में उत्कृष्ट परिणाम देने के लिए प्रसिद्ध कोचिंग संस्थान एलिट इंस्टिट्यूट आर्थिक तंगी के चलते बंद होने की कगार पर है। संस्थान के संस्थापक-निदेशक अमरदीप झा गौतम ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए बताया कि कोरोना काल के बाद से कोचिंग संस्थानों को कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार द्वारा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग संस्थानों को सुविधा देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अभी तक किसी प्रकार की कोई सहायता प्राप्त नहीं हो सकी है।
अमरदीप झा गौतम ने कहा कि इस कारण कई कोचिंग संस्थान आर्थिक दबाव में आ गए हैं और बंद होने की स्थिति में पहुँच रहे हैं। कोचिंग एसोसिएशन ऑफ बिहार के सदस्यों ने कई बार सरकार को लिखित आवेदन देकर व्यापार ऋण, सुरक्षा और आधारभूत संरचनाओं के लिए सहायता की मांग की है, लेकिन इस दिशा में अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने 2023 के बाद सरकारी कोचिंग संस्थान खोल दिए, जिसका सीधा प्रभाव निजी कोचिंग संस्थानों पर पड़ा है। इसने बच्चों और अभिभावकों के मनोवैज्ञानिक सोच को प्रभावित किया, जिससे निजी संस्थानों में नामांकन कम हो गया।
पटना सहित अन्य जगहों के कई शिक्षक और कोचिंग संचालक भी इस स्थिति से बेहद परेशान हैं। वे खुद को अकेला और असहाय महसूस कर रहे हैं, साथ ही गुंडा-मवालियों के उत्पीड़न से अपनी इज्जत बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अमरदीप झा ने बताया कि इस दबाव में कुछ शिक्षक डर कर संस्थान छोड़ रहे हैं, तो कुछ ने तो आत्महत्या जैसे घातक कदम उठाए हैं।
उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि निजी कोचिंग संस्थानों को तत्काल आर्थिक एवं सुरक्षा सहायता उपलब्ध कराकर उनके अस्तित्व को बचाया जाए। उन्होंने कहा, “कोचिंग संस्थान न केवल बच्चों के भविष्य का निर्माण करते हैं, बल्कि यह कई परिवारों के लिए रोज़गार का स्रोत भी हैं। इनकी मदद करना राज्य की जिम्मेदारी है।”
सरकार की ओर से अभी तक निजी कोचिंग संस्थानों की इस गंभीर समस्या पर कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है, जिससे स्थिति और गंभीर होती जा रही है। शिक्षकों का मानना है कि अगर समय रहते इस संकट का समाधान नहीं हुआ तो बहुत से प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान बंद हो जाएंगे, जो शिक्षा के क्षेत्र और समाज के लिए नुकसानदायक होगा।
कोविड-19 के बाद शिक्षा क्षेत्र में आए बदलावों ने निजी कोचिंग संस्थानों को अस्तित्व के संकट में ला दिया है। आर्थिक समस्याओं के चलते शिक्षा का स्तर गिरने का खतरा है, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का प्रभाव भी पड़ेगा।
अंत में, कोचिंग संस्थान एवं शिक्षक समुदाय सरकार से जल्द से जल्द मदद की उम्मीद कर रहे हैं ताकि वे न केवल अपनी प्रतिष्ठा बचा सकें बल्कि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी प्रदान कर सकें और आर्थिक-सामाजिक समस्याओं से लड़ सकें।
