इम्पा का वेव्स फिल्म बाजार 2025 में स्वर्णिम प्रदर्शन: सिनेमा की नई ऊंचाइयों का उत्सव

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By Anubhav Ranjan

गोवा की सुनहरी रेत पर सूरज की किरणें जब समुद्र से टकराती हैं, तो वहां एक जादुई दुनिया रंगीन हो उठती है – सिनेमा की दुनिया। इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स’ एसोसिएशन (इम्पा) ने इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (इफ्फी) के 56वें संस्करण के साथ वेव्स फिल्म बाजार 2025 में अपनी चमक बिखेरी है। 20 से 24 नवंबर तक मैरियट रिजॉर्ट के पवित्र परिसर में चला यह आयोजन, सिनेमा, सहयोग और उपलब्धि का एक जीवंत कैनवास बन गया। इम्पा के प्रेसिडेंट अभय सिन्हा के नेतृत्व में एसोसिएशन ने न केवल अपनी नई रचनाओं को प्रदर्शित किया, बल्कि भारतीय फिल्म उद्योग की आत्मा को वैश्विक पटल पर उकेरा। जैसे कोई महाकाव्य, यह बाजार कहानियों के बीज बो रहा था, जहां सपने वास्तविकता का रूप लेते नजर आए।

पवेलियन का उद्घाटन एक समारोहिक नृत्य की तरह हुआ – डॉ. एल. मुरुगन, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के राज्य मंत्री, और संजय जाजू, मंत्रालय के सचिव, ने दीप प्रज्वलित कर शुरुआत की। मंच के दिग्गज अभिनेता मनोज जोशी की उपस्थिति ने इस पल को अमर बना दिया, जैसे कोई पुरानी फिल्म का क्लासिक सीन जीवंत हो उठा। इम्पा का दल – अभय सिन्हा (प्रेसिडेंट), सुषमा शिरोमणी (सीनियर वाइस प्रेसिडेंट), सुरेंद्र “टीनू” वर्मा व अतुल पटेल (वाइस प्रेसिडेंट), निशांत उज्ज्वल (वर्किंग कमेटी मेंबर व एफएमसी जनरल सेक्रेट्री), तथा यूसुफ शेख (वर्किंग कमेटी मेंबर) – ने इस मंच पर अपनी एकजुटता दिखाई। उनके चेहरों पर गर्व था, जैसे कोई कलाकार अपनी कृति पर मुस्कुरा रहा हो। यह पवेलियन इम्पा के सदस्यों की साहसिक कहानियों का खजाना था – ब्लाइंड गेम की रहस्यमयी गहराई, गनमास्टर जी 9 की एक्शन भरी धुन, स्वेट पैंट्स की युवा ऊर्जा, ज़िद्दी जट्ट की विद्रोही लय, दामिनी 2.0 की न्याय की पुकार, कंट्रोल की मनोवैज्ञानिक उलझन, अजब टार्ज़न नी गजब कहानी का हास्यपूर्ण जंगल, जीवी की भावुक यात्रा, और कई अन्य परियोजनाएं। ये न केवल स्क्रिप्ट्स थीं, बल्कि सपनों के धागे, जो दर्शकों को बांधने को तैयार थे।

इस वर्ष इम्पा ने खुद को बाजार का केंद्र बनाया – अपनी गतिविधियों व उपलब्धियों को रौशनी में लाकर। को-प्रोडक्शन के द्वार खोले गए, जहां दक्षिण एशियाई व वैश्विक फिल्मकारों ने हाथ मिलाए। बाजार में 300 से अधिक प्रोजेक्ट्स ने जगह पाई – 22 फीचर फिल्में व 5 डॉक्यूमेंट्री, जो कला, पर्यावरण, शिक्षा, महिला आंदोलन व मानवशास्त्र जैसे विषयों को छूतीं। किरण राव, विक्रमादitya मोटवानी, शकुन बत्रा, देवाशीष मखीजा जैसे दिग्गजों की मौजूदगी ने ऊर्जा दोगुनी कर दी। इम्पा की टीम ने मीटिंग्स की श्रृंखला बांधी – संभावित साझेदारियों पर विमर्श, जहां कहानियां नई उड़ान भरें। एशिया टीवी फोरम के साथ साझेदारी ने ‘ग्लोरिया’ जैसे प्रोजेक्ट्स को अंतरराष्ट्रीय पुल बनाया। वर्क-इन-प्रोग्रेस लैब्स, नॉलेज सीरीज व प्रोड्यूसर्स वर्कशॉप्स ने सिनेमा को नई सांस दी।

अभय सिन्हा ने कहा, “यह बाजार सिनेमा की आत्मा का मेला है – जहां सहयोग की लहरें उठती हैं, उपलब्धियां गूंजती हैं। इम्पा अपने सदस्यों व उनकी फिल्मों का साथ निभाता रहेगा, ताकि भारतीय कहानियां दुनिया को छुएं।” बाजार ने 2000 से अधिक प्रतिनिधियों को आकर्षित किया, 30 देशों से। तकनीकी पवेलियन में वीएफएक्स, सीजीआई व एआई की चमक ने भविष्य का द्वार खोला। सिनेमाई हैकाथॉन ने नवाचार को बढ़ावा दिया। गोवा की हवा में सिनेमा की सुगंध घुली – जहां हर बातचीत एक नई फिल्म का बीज थी। इम्पा का यह जश्न भारतीय सिनेमा को मजबूत कर रहा है, जहां सपने स्क्रीन पर साकार होते हैं। आने वाले वर्षों में यह ऊर्जा और चमकेगी, वैश्विक मंच पर भारत की धाक जमाएगी।

प्रशांत कुमार ‘प्रणय’