पूर्वी चंपारण में विराट रामायण मंदिर को मिलेगा विशाल शिवलिंग: तमिलनाडु से रवाना, 2026 तक स्थापना

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By Anubhav Ranjan

बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में केसरिया-चकिया पथ पर कैथवलिया-बहुआरा स्थित विराट रामायण मंदिर विश्व का सबसे भव्य धार्मिक स्थल बनने की राह पर अग्रसर है। यहां एक विशाल शिवलिंग स्थापित करने की तैयारी तेज हो गई है, जो मंदिर की महिमा को और बढ़ाएगा। तमिलनाडु के महाबलीपुरम से काले ग्रेनाइट का यह भव्य शिवलिंग रवाना हो चुका है। धार्मिक न्यास बोर्ड के सदस्य और आचार्य किशोर कुणाल के पुत्र सायन कुणाल ने बताया कि जनवरी या फरवरी 2026 तक इसे मंदिर में प्रतिष्ठित कर दिया जाएगा। यह शिवलिंग 33 फीट ऊंचा, 20 फीट चौड़ा और 210 मीट्रिक टन वजनी होगा, जो भगवान शिव के प्रतीक के रूप में पूजा का केंद्र बनेगा।

 

विराट रामायण मंदिर परियोजना पटना के महावीर मंदिर न्यास द्वारा संचालित है, जिसका भूमिपूजन 2012 में हुआ था और शिलान्यास 2022 में। 1080 फीट लंबा, 540 फीट चौड़ा तथा 270 फीट ऊंचा यह मंदिर 12 शिखरों वाला होगा, जो अयोध्या के राम मंदिर से भी पांच गुना विशाल होगा। 200 एकड़ में फैला यह परिसर 18 देवताओं के मंदिरों से युक्त होगा, जहां रामायण की कथाओं को जीवंत किया जाएगा। शिवलिंग की स्थापना से मंदिर में भगवान शिव का विशाल प्रतिरूप स्थापित होगा, जो भक्तों को आकर्षित करेगा। सायन कुणाल ने कहा, “यह शिवलिंग तमिलनाडु की प्राचीन शिल्पकला का उत्कृष्ट नमूना है। महाबलीपुरम से चकिया तक 12 किमी सड़क मजबूत बनाने की योजना है, क्योंकि परिवहन गति मात्र 5 किमी प्रति घंटा रहेगी।”

 

निर्माण कार्य 2023 से तेजी से चल रहा है, जिसमें 24 घंटे श्रमिक लगे हैं। न्यास बोर्ड के अनुसार, 2027 तक तीन मंजिला भवन पूर्ण हो जाएगा। एक मुस्लिम परिवार द्वारा 23 कट्ठा भूमि दान की मिसाल ने हिंदू-मुस्लिम एकता को दर्शाया। मंदिर रामनवमी 2026 से दर्शन के लिए खुल सकता है। आचार्य किशोर कुणाल ने जिलाधिकारी से सड़क निर्माण हेतु चर्चा की है। यह परियोजना बिहार के धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाई देगी, रोजगार सृजित करेगी तथा वैश्विक स्तर पर रामायण की महत्ता को रेखांकित करेगी। भक्तों में उत्साह व्याप्त है, जो मंदिर को तीर्थराज बनाने को आतुर हैं।

प्रशांत कुमार ‘प्रणय’